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Updated Wed, 05 May 2021 11:35 PM

शव श्मशान पहुंचाने का मनमाना किराया वसूल रहे एंबुलेंस चालक

जेएनएन, बागपत : जिदगी लील रहे कोरोना संक्रमण के काल में मानवीय संवेदनाएं भी तार-तार हो रही हैं। मुनाफाखोर मौके पर फायदा उठाते हुए मनमाना कमाई करने पर उतारू हैं। खासकर बड़ौत शहर के एंबुलेंस चालक बेलगाम होकर हास्पिटल से शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए मनमाना किराया वसूल रहे हैं। व्यापार संगठनों के पदाधिकारियों ने डीएम से रेट लिस्ट तय करते हुए मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। बड़ौत शहर में प्राइवेट एंबुलेंस चालक शवों को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए मनमाना रेट वसूल कर रहे हैं। प्राइवेट एंबुलेंस चालक आम दिनों से चार से पांच गुना किराया चार्ज कर रहे हैं। इतना ही नहीं, मृतक के स्वजनों से ड्राइवर के लिए पीपीई किट और गाड़ी को साफ करने का सोल्यूशन अलग से डिमांड करते हैं। मजबूरी में लोगों को इनकी हर डिमांड पूरी करनी पड़ती है।

दहशत में छोड़ भागे अस्पताल और फिर अस्पताल में ही हुई मौत

जेएनएन, बागपत : जिला अस्पताल में तीन मौत होने के बाद दहशत में एक युवक को जिला अस्पताल से स्वजन ले गए। गंभीर हालत में युवक का उपचार कराने के लिए स्वजन इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन कोविड-19 अस्पताल ने उसे इसलिए भर्ती नहीं किया कि उसके पास रेफर के कागजात नहीं थे और आस्था अस्पताल में इसलिए भर्ती नहीं किया कि यहां मरीजों से बेड फुल है। लिहाजा स्वजन उसे कार में लेकर इधर-उधर भटकते रहे। चिताजनक हालत में उसे दोबारा जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसने दम तोड़ दिया। सोनीपत जनपद के भैरा बाकीपुर गांव के रहने वाले कर्मवीर ने बताया कि उसका भाई प्रदीप पिछले पांच माह से बागपत शहर के पक्का घाट रहता था। दो दिन पहले उसे बुखार और सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई, तो सोमवार को उन्होंने उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। मंगलवार को उसकी कोविड-19 की जांच की गई, तो अस्पताल की ओर से रिपोर्ट को आधी-अधूरी बताया गया। इसी दौरान अस्पताल में तीन मरीजों की मौत हो गई, जिसके बाद स्वजन ने समझा कि यहां उपचार ठीक नहीं है। तीन मौत से दहशत में स्वजन प्रदीप को आस्था अस्पताल में ले आए, लेकिन यहां मरीजों से बेड फुल होने के कारण उन्हें यहां एंट्री नहीं मिली। इसके बाद स्वजन आनन-फानन में प्रदीप को कोविड-19 अस्पताल खेकड़ा ले गए, वहां उनके पास न तो जिला अस्पताल से रेफर के कागजात थे और न ही कोविड-19 की रिपोर्ट। लिहाजा वहां भी प्रदीप को भर्ती नहीं किया गया। उसके बाद स्वजन प्रदीप को लेकर आस्था अस्पताल बड़ौत की ओर दौड़े। यहां फिर उसके स्वजन को बेड फुल होने की समस्या बताई गई। इसी दौरान प्रदीप की कार में लगी आक्सीजन समाप्त होने लगी और उसे खिच खिच कर सांस आने लगी। इस पर स्वजन प्रदीप को लेकर दोबारा जिला अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। चिकित्सकों की मान-मनव्वल के बाद प्रदीप को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया।

नेशनल एथलीट आत्माराम का कोरोना से निधन

बागपत, जेएनएन। शूटर दादी चंद्रो तोमर के निधन के बाद अब एथलीट आत्माराम तोमर भी जिदगी की जंग हार गए। उन्होंने चंडीगढ़ के अस्पताल में अंतिम सांस ली। तोमर ने राष्ट्रीय स्तर पर कई दर्जन पदक जीते। उनके निधन से खिलाड़ियों में मायूसी है। कंडेरा गांव के रहने वाले पूर्व प्रधानाध्यापक आत्माराम तोमर ने हाफ मैराथन दौड़ में सोने-चांदी और कांस्य के कई दर्जन पदक जीते। 14 मार्च को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में हुई राष्ट्रीय मास्टर एथलेटिक चैंपियनशिप में 5000 मीटर की दौड़ केवल 30 मिनट में पूरी कर स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने छतीसगढ़ में हुई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। आत्माराम तोमर ने क्षेत्र के भी युवाओं को खेल के लिए प्रेरित किया। शिक्षा जगत में भी उनका काफी योगदान रहा। रिटायर होने के बाद भी वह अपने घर पर ही बच्चों को निशुल्क शिक्षा देते रहे। उनके बेटे सुधीर तोमर ने बताया कि एक सप्ताह पहले उन्हें बुखार की शिकायत हुई तो उन्होने गांव से ही दवा ली। तीन दिन पहले सांस लेने में परेशानी होने पर उन्हें चंडीगढ़ के हास्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां वेंटीलेटर पर रखा गया। देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। मंगलवार को उनका हास्पिटल में ही स्वजन की देखरेख में अंतिम संस्कार किया गया। उनके दो बेटे सुधीर व पारुल हैं। नहीं नजर आया लाकडाउन, बेवजह सड़कों पर घूमते रहे लोग